Tuesday, September 22, 2020

kavita ~ख्वाहिशें

 ख्वाहिशे  एक दिन यूहीं ख़तम हो जाएगी वक़्त के साथ ख्वाहिशें और ज़िन्दगी सच ये भी है कि उम्र दुकानों पर नहीं बिकती है। देखो.. झांकने लगी ह...

Kavita ~ स्त्री की आजादी

स्त्री की आजादी स्त्री आजाद है किसी पतंग की तरह जैसे उसकी डोर खीचता है कोई और एक जाल रिश्तों को भी होता है जो दिखाई नहीं देता किसी मकड़जाल क...

Kavita ~ रोज़गार

 रोजगार ऐसा लगता है कोई  पतझड़ के मौसम में बहार ढूंढता है। एक नोजवान जब  तपती सड़क पर  रोजगार ढूंढता है।।

Kavita ~ रूह और जिस्म

रूह और ज़िस्म जिस्म चमकता है तब तक जब तक सांसे है! गर साँसे ना हो फिर जिस्म बोझ बन जाता है। सच पूछो तो ज़िस्म एक लिबास है। जिसे रूह ओढ़कर रखती ...

Monday, September 21, 2020

Kavita -मोह के धागे

वो मोह ही तो है जो बांधकर रखता है मुझे तुमसे अक्सर दिखाई नही देते मोह के बारीक धागे पर समेटकर रखते है रिश्तो की कोई तह  जम गई हो जैसे।।